कोलकाता / आसनसोल: आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए राज्य में कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले और नई नियुक्तियों का आदेश जारी किया है।
यह आदेश 17 मार्च 2026 को जारी किया गया, जिसके तहत कानून-व्यवस्था को मजबूत और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अहम बदलाव किए गए हैं।
आसनसोल-दुर्गापुर को मिला नया पुलिस आयुक्त
जारी आदेश के अनुसार—
- डॉ. प्रणव कुमार (आईपीएस 2003) को आसनसोल-दुर्गापुर का नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है।
यह नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र को चुनाव के दौरान संवेदनशील और महत्वपूर्ण इलाकों में गिना जाता है।
उत्तर और दक्षिण बंगाल में नई तैनाती
चुनाव आयोग ने बड़े स्तर पर क्षेत्रीय नेतृत्व में भी बदलाव किए हैं—
- डॉ. राजेश कुमार सिंह (आईपीएस 1997) को दक्षिण बंगाल क्षेत्र में एडीजी एवं आईजीपी बनाया गया है
- के. जयरामन (आईपीएस 1997) को उत्तर बंगाल क्षेत्र में एडीजी एवं आईजीपी की जिम्मेदारी सौंपी गई है
इन नियुक्तियों का उद्देश्य पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करना है।
प्रमुख शहरों में भी नए पुलिस आयुक्त
इसके अलावा राज्य के अन्य महत्वपूर्ण शहरों में भी नए पुलिस आयुक्तों की नियुक्ति की गई है—
- अखिलेश कुमार चतुर्वेदी (आईपीएस 2005) – हावड़ा पुलिस आयुक्त
- अमित कुमार सिंह (आईपीएस 2009) – बैरकपुर पुलिस आयुक्त
- सुनील कुमार यादव (आईपीएस 2009) – चंदननगर पुलिस आयुक्त
चुनाव आयोग का सख्त निर्देश
चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि—
- सभी अधिकारी तुरंत प्रभाव से अपनी नई पोस्टिंग पर ज्वाइन करें
- 18 मार्च 2026 सुबह 11 बजे तक ज्वाइनिंग रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा
चुनाव ड्यूटी से दूर रहेंगे तबादला अधिकारी
आयोग ने यह भी साफ किया है कि जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उन्हें चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी चुनाव संबंधी जिम्मेदारी में तैनात नहीं किया जाएगा।
इस कदम को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव से पहले सख्ती के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग के इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव में किसी भी तरह की गड़बड़ी या पक्षपात को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रशासनिक स्तर पर किए गए ये बड़े बदलाव यह दर्शाते हैं कि आयोग कानून-व्यवस्था और निष्पक्षता को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
अब देखना होगा कि इन नई नियुक्तियों का चुनावी माहौल और सुरक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।














