पश्चिम बर्धमान: श्रम कोड रद्द करने की मांग को लेकर देशव्यापी औद्योगिक हड़ताल के बीच आसनसोल में बुधवार को तनावपूर्ण स्थिति देखने को मिली। बीएनआर मोड़ स्थित एक सरकारी बैंक के सामने सीटू (CITU) समर्थकों द्वारा पिकेटिंग की जा रही थी, जिससे बैंक का सामान्य कामकाज प्रभावित होने लगा।
सूचना मिलने पर आसनसोल दक्षिण थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। पिकेटिंग हटाने को लेकर पुलिस और सीटू नेतृत्व के बीच तीखी बहस हुई। अंततः पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाकर बैंक कर्मचारियों को अंदर प्रवेश कराया, जिसके बाद बैंक का कामकाज शुरू हो सका।
🏭 औद्योगिक क्षेत्र में मिला-जुला असर
हालांकि बैंक के सामने माहौल गरम रहा, लेकिन आसनसोल के औद्योगिक क्षेत्र में हड़ताल का व्यापक असर देखने को नहीं मिला। कई फैक्ट्रियों और निजी प्रतिष्ठानों में कामकाज सामान्य रूप से चलता रहा।
‘जस्ट रेडी यूनियन’ सहित दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर यह औद्योगिक हड़ताल बुलाई गई थी। इसी क्रम में सुबह से ही बीएनआर क्षेत्र में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कार्यालय के सामने वामपंथी ट्रेड यूनियनों द्वारा प्रदर्शन किया गया।
🗣️ वाम नेताओं का आरोप
वामपंथी नेता पार्थ मुखर्जी ने कहा कि यह आंदोलन श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके लगाए गए बैनर को हटा दिया और अनावश्यक दबाव बनाया।
पार्थ मुखर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस सत्तारूढ़ दल के इशारे पर काम कर रही है, जो निंदनीय है। उन्होंने कहा, “आसनसोल आंदोलन की धरती रही है। यहां श्रमिकों की आवाज दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
⚖️ श्रम कोड पर विवाद क्यों?
नए श्रम कोड को लेकर ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि इससे श्रमिकों के अधिकार कमजोर होंगे, नौकरी की सुरक्षा घटेगी और निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। वहीं सरकार का कहना है कि नए श्रम कानून श्रम सुधार और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
📌 स्थिति पर नजर
फिलहाल आसनसोल में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से माहौल गरम है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि श्रम कोड के मुद्दे पर आंदोलन कितना व्यापक रूप लेता है और आसनसोल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में इसका क्या असर पड़ता है।











