नई दिल्ली/कोलकाता: संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आज 12 फरवरी को देशव्यापी भारत बंद किया जा रहा है। इस बंद को लेकर कई राज्यों में व्यापक तैयारियां की गई हैं। संगठनों का दावा है कि करीब 30 करोड़ मजदूर और कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हो सकते हैं।
📌 किन मुद्दों पर हो रहा है विरोध?
किसान, मजदूर और कर्मचारी संगठनों ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोला है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—
- भारत–अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते का विरोध
- चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को वापस लेने की मांग
- सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर रोक
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली
- न्यूनतम वेतन में वृद्धि
- निर्माण और बिजली क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा
- कृषि से जुड़े कानूनों और नीतियों में बदलाव
INTUC, AITUC, CITU, HMS सहित कई राष्ट्रीय यूनियनों ने इस बंद को समर्थन दिया है।
🏦 बैंकिंग सेवाओं पर असर
बैंक यूनियनों के शामिल होने से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में कामकाज प्रभावित होने की संभावना है। AIBEA, AIBOA और BEFI जैसी यूनियनों ने हड़ताल में भाग लेने की घोषणा की है। ऐसे में काउंटर सेवाओं, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग कार्यों में देरी हो सकती है। हालांकि, ऑनलाइन बैंकिंग और एटीएम सेवाएं सामान्य रहने की संभावना जताई जा रही है।
🚌 परिवहन और बाजार पर प्रभाव
कई राज्यों में बस, ऑटो-रिक्शा और ट्रक यूनियनों के समर्थन से परिवहन सेवाएं बाधित हो सकती हैं। बाजारों में आंशिक बंद का असर देखने को मिल सकता है। कुछ स्थानों पर स्कूल और कॉलेज प्रशासन ने एहतियातन ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का निर्णय लिया है।
⚖️ सरकार और संगठनों के बीच टकराव
संगठनों का कहना है कि सरकार की नीतियां श्रमिकों और किसानों के हितों के खिलाफ हैं, जबकि सरकार का पक्ष है कि सुधारात्मक कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी हैं।
आज का भारत बंद यह तय करेगा कि किसान और मजदूर संगठनों की एकजुटता सरकार पर कितना दबाव बना पाती है। फिलहाल देशभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
देश की जनता की नजर अब इस बात पर है कि बंद का असर कितना व्यापक होता है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।











