चुनाव से पहले बंगाल में बवाल, आशा के बाद सफाई कर्मियों की हड़ताल

single balaji

आसनसोल:
पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे राज्य की राजनीति में उबाल तेज होता जा रहा है। पहले आशा कर्मियों का आंदोलन और अब सफाई कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल—इन दो बड़े जनआंदोलनों ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
वेतन वृद्धि, पीएफ, ईएसआई सुविधा और कैजुअल स्टाफ का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर दोनों ही वर्ग लंबे समय से संघर्षरत हैं, जिसका सीधा असर अब सड़कों और गलियों में साफ नजर आने लगा है।

🧹 हड़ताल का सीधा असर, आसनसोल में कचरे के ढेर

सफाई कर्मियों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आसनसोल नगर निगम क्षेत्र में देखने को मिल रहा है। शहर के कई इलाकों में कचरे के अंबार लग गए हैं। दुर्गंध और गंदगी से आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।

⚖️ बजट में आशा कर्मियों को राहत, सफाई कर्मी उपेक्षित?

हाल ही में पेश राज्य बजट में आशा कर्मियों के मानदेय में करीब 1,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई, लेकिन सफाई कर्मियों की मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं हुआ।
नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि निगम की आर्थिक स्थिति कमजोर है और अगले दो वर्षों तक वेतन बढ़ोतरी संभव नहीं है, हालांकि अन्य मांगों पर विचार किया जा सकता है।

सफाई कर्मियों का आरोप है कि यह सिर्फ आश्वासन है—
👉 पीएफ खातों में कटौती हो रही है, लेकिन राशि जमा नहीं की जा रही।
👉 ईएसआई और स्थायी दर्जे पर भी सिर्फ बातें हो रही हैं।

🏛️ चुनावी रणनीति में उलझी राजनीति

चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुटे हैं।

  • तृणमूल कांग्रेस अपनी जनकल्याणकारी योजनाओं को आगे रख रही है।
  • वहीं भाजपा कोयला, बालू, पत्थर, शिक्षा जैसे कथित घोटालों को लेकर सरकार पर हमला बोल रही है।
    भाजपा का आरोप है कि राज्य की जनता को केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा और तृणमूल कांग्रेस कथित तौर पर घुसपैठियों के वोट के सहारे सत्ता में बनी हुई है।

🚨 विपक्ष का आक्रामक रुख

सफाई कर्मियों के आंदोलन को लेकर भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम भी खुलकर मैदान में उतर आई हैं।
कहीं कार्यकर्ता खुद सड़क पर उतरकर कचरा साफ कर विरोध जता रहे हैं, तो कहीं नगर निगम का घेराव कर प्रशासन पर दबाव बनाया जा रहा है।

भाजपा के पश्चिम बर्दवान जिला अध्यक्ष देबतनु भट्टाचार्य और राज्य नेता कृष्णेंदु मुखर्जी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि—

“कर्मचारियों के वेतन से पीएफ की कटौती हो रही है, तो फिर वह पैसा जा कहां रहा है?”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो भाजपा बड़ा जन आंदोलन करेगी।

⚠️ “पूरा शिल्पांचल कूड़े में तब्दील हो रहा है”

कृष्णेंदु मुखर्जी ने कहा कि पूरा शिल्पांचल कचरे से भरता जा रहा है, और इसके लिए पूरी तरह से तृणमूल कांग्रेस सरकार जिम्मेदार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो यह मुद्दा आने वाले चुनाव में बड़ा हथियार बन सकता है।

ghanty

Leave a comment