चुनाव से पहले ममता सरकार का बड़ा दांव, मुर्शिदाबाद को मिला नया विश्वविद्यालय

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कोलकाता/मुर्शिदाबाद:
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार ने मुर्शिदाबाद जिले के लिए एक बड़ा और अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने मुर्शिदाबाद में नए विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी दे दी है। गुरुवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। सूत्रों के मुताबिक, इससे जुड़ा विधेयक मौजूदा विधानसभा सत्र में ही पेश किया जा सकता है।

सरकार द्वारा प्रस्तावित इस नए विश्वविद्यालय का नाम होगा—
👉 ‘मुर्शिदाबाद हजारदुआरी विश्वविद्यालय’
खास बात यह है कि जिले में पहले से एक विश्वविद्यालय मौजूद होने के बावजूद, लंबे समय से एक और उच्च शिक्षण संस्थान की मांग उठ रही थी।

🗳️ चुनाव से पहले असंतोष कम करने की कोशिश?

राज्य के अल्पसंख्यक बहुल इस जिले में बीते कुछ समय से राजनीतिक हलचल तेज रही है।
धार्मिक तनाव, हुमायूं कबीर दल का गठन, बाबरी मस्जिद के निर्माण से जुड़ी चर्चाएं और दूसरे राज्यों में प्रवासी मजदूरों पर हमलों जैसे मुद्दों ने इलाके की राजनीति को गरमा दिया है।

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि इन तमाम घटनाओं के चलते तृणमूल कांग्रेस के प्रति असंतोष बढ़ा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले चुनाव में इसका असर दिख सकता है। ऐसे में हजारदुआरी विश्वविद्यालय की घोषणा को चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।

🎓 विकास और शिक्षा पर फोकस

हालांकि सत्ताधारी दल इस फैसले को विकास की दिशा में बड़ा कदम बता रहा है।
मुर्शिदाबाद न केवल पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा जिला है, बल्कि देश के बड़े जिलों में भी इसकी गिनती होती है। यहां नए विश्वविद्यालय की स्थापना से—

  • स्थानीय छात्रों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे
  • बाहर पलायन करने वाले छात्रों की संख्या घटेगी
  • जिले में शैक्षणिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा

शिक्षाविदों का मानना है कि हजारदुआरी जैसे ऐतिहासिक स्थल के नाम पर विश्वविद्यालय बनने से जिले की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी।

💰 बजट के साथ बड़ी घोषणाएं, सियासी पारा हाई

गौरतलब है कि इसी दिन राज्य सरकार ने बजट भी पेश किया, जिसमें कई लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा की गई।
चुनाव से पहले एक के बाद एक बड़े फैसलों से यह साफ है कि बंगाल की राजनीति में सियासी सरगर्मी चरम पर पहुंच चुकी है।

अब सवाल यह है—
क्या ‘हजारदुआरी विश्वविद्यालय’ मुर्शिदाबाद में सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष को कम कर पाएगा, या फिर विपक्ष इसे चुनावी स्टंट करार देगा?

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