सुप्रीम कोर्ट में ‘वकील’ बनकर पहुंचेंगी ममता बनर्जी? SIR मामले में बड़ा संकेत

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बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मौजूदगी लगभग तय मानी जा रही है। खास बात यह है कि इस बार ममता बनर्जी एक वकील के रूप में अदालत में नजर आ सकती हैं। यह उपस्थिति SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले की सुनवाई के दौरान होगी, जिसे लेकर राज्य की राजनीति पहले से ही गर्म है।

सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ के समक्ष प्रस्तावित है। कानूनी मामलों की रिपोर्टिंग करने वाले प्रतिष्ठित पोर्टल बार एंड बेंच के मुताबिक, बुधवार के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम से सुप्रीम कोर्ट का गेट पास जारी किया गया है, जिससे उनकी मौजूदगी लगभग तय मानी जा रही है।

सोशल मीडिया से मिले संकेत

तृणमूल कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया के जरिए इस ओर इशारा किया है। पार्टी के X (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर साझा की गई एक तस्वीर में नीले बॉर्डर वाली सफेद साड़ी और काले वकील के कोट में एक महिला सुप्रीम कोर्ट की सीढ़ियां चढ़ती नजर आ रही हैं, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बताया गया है। पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया—
“लोगों का वकील बनाम शैतान का वकील।”
साथ ही यह भी कहा गया कि ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में SIR मामले को चुनौती देने जा रही हैं।

याचिकाओं की स्थिति

SIR से जुड़े मामलों में तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन की याचिका कोर्ट नंबर 1 में सुनवाई सूची में 21वें नंबर पर है। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा इसी मुद्दे पर दायर याचिका 37वें नंबर पर सूचीबद्ध है। प्रसिद्ध कवि जॉय गोस्वामी की याचिका भी इसी पीठ के समक्ष 36वें नंबर पर रखी गई है।

चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। यह मामला रविवार को सामने आया था। फिलहाल ममता बनर्जी दिल्ली में मौजूद हैं। सोमवार को उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘घमंडी और अनुचित व्यवहार’ का आरोप लगाते हुए एक बैठक से वॉकआउट भी किया था।

इस बैठक में ममता बनर्जी के साथ अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी और SIR से प्रभावित परिवारों के 12 सदस्य शामिल थे।

छह पत्र और लगातार टकराव

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री इससे पहले भी SIR प्रक्रिया को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त को छह पत्र भेज चुकी हैं। दिल्ली में मुलाकात से ठीक 48 घंटे पहले उन्होंने एक और पत्र भेजा था, जो शनिवार शाम को सार्वजनिक हुआ। उस पत्र में चुनाव आयोग पर रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

मुख्यमंत्री का साफ कहना है कि SIR प्रक्रिया कानून और नियमों के खिलाफ है और इसे लागू करते समय मानवीय पहलुओं की पूरी तरह अनदेखी की गई है। अब सबकी नजरें बुधवार की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां ममता बनर्जी खुद सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर मजबूती से अपनी बात रख सकती हैं।

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