एसआईआर में तैनात अफसरों के तबादले पर चुनाव आयोग सख्त, आदेश वापस लेने का निर्देश

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कोलकाता:
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कार्य के बीच राज्य सरकार और चुनाव आयोग के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। एसआईआर में तैनात तीन वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर चुनाव आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है और राज्य सरकार को तत्काल आदेश वापस लेने का निर्देश दिया है।

चुनाव आयोग ने इस संबंध में राज्य के मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को एक कड़ा पत्र भेजा है। पत्र में साफ शब्दों में कहा गया है कि एसआईआर से जुड़े किसी भी अधिकारी का तबादला या उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी देना आयोग की पूर्व अनुमति के बिना नियमों का उल्लंघन है। आयोग ने राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश को तुरंत प्रभाव से रद्द करने का निर्देश दिया है।

📌 किन अधिकारियों को लेकर विवाद?

इस मामले में जिन तीन आईएएस अधिकारियों के तबादले और अतिरिक्त जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे हैं, उनके नाम हैं—

  • अश्विनीकुमार यादव
  • रणधीर कुमार
  • स्मिता पांडे

चुनाव आयोग के अनुसार,

  • अश्विनीकुमार यादव उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर के पर्यवेक्षक हैं,
  • रणधीर कुमार उत्तर 24 परगना और कोलकाता उत्तर के पर्यवेक्षक के रूप में तैनात हैं,
  • जबकि स्मिता पांडे पश्चिम बर्दवान, पूर्व बर्दवान और बीरभूम की पर्यवेक्षक थीं।

हाल ही में राज्य सरकार ने अश्विनीकुमार यादव और रणधीर कुमार को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी थी, वहीं स्मिता पांडे के तबादले का आदेश जारी किया गया था। आयोग ने इन सभी कदमों को नियमों के खिलाफ बताया है।

🛑 आयोग का सख्त संदेश

चुनाव आयोग ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े किसी भी अधिकारी के संबंध में कोई भी प्रशासनिक निर्णय लेने से पहले आयोग की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही राज्य सरकार को बुधवार तक एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि आयोग के आदेशों का पालन किया गया है या नहीं।

🗳️ ज़मीन पर जारी है एसआईआर प्रक्रिया

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य ज़ोरों पर चल रहा है।

  • बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) गांव-गांव और घर-घर जाकर सत्यापन कर रहे हैं।
  • एन्यूमरेशन फॉर्म का वितरण और संग्रह शुरू हो चुका है।
  • बाहर काम करने वाले मतदाताओं के लिए ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म भरने की सुविधा भी दी गई है।

यह प्रक्रिया केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के 11 अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी एक साथ चल रही है।

🔍 चुनावी साल में बढ़ी सियासी संवेदनशीलता

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले एसआईआर जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर आयोग की सख्ती यह संकेत देती है कि चुनावी निष्पक्षता को लेकर आयोग किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और गरमाने की संभावना जताई जा रही है।

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