भारतीय जनता पार्टी के अखिल भारतीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन पहली बार पश्चिम बंगाल के दौरे पर आ रहे हैं। उनका यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके तुरंत बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी बंगाल पहुंचने वाले हैं। भाजपा नेतृत्व के इन लगातार दौरों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है।
राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने जानकारी दी कि नितिन नवीन 27 जनवरी को कोलकाता पहुंचेंगे। यह उनका दो दिवसीय बंगाल दौरा होगा।
🏛️ दिल्ली बैठक के बाद लिया गया दौरे का फैसला
भाजपा सूत्रों के अनुसार, बुधवार को दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई अहम बैठक के बाद नितिन नवीन ने पश्चिम बंगाल आने का निर्णय लिया। इस बैठक में—
- केंद्रीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी
- भाजपा शासित राज्यों के प्रभारी पर्यवेक्षक
- विभिन्न राज्यों के भाजपा अध्यक्ष
- संगठन के राष्ट्रीय सचिव
मौजूद थे।
हालांकि पार्टी की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक मजबूती, चुनावी रणनीति और आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर विस्तार से मंथन किया गया।
📍 कोलकाता के बाद बर्दवान जाएंगे नितिन नवीन
राज्य भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य के अनुसार, कोलकाता पहुंचने के अगले दिन नितिन नवीन बर्दवान का दौरा करेंगे। वहां वे—
- जनसभा करेंगे
या - संगठनात्मक बैठक में हिस्सा लेंगे
इसको लेकर पार्टी की ओर से अभी अंतिम कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है। बर्दवान दौरे के बाद नितिन नवीन दिल्ली लौट जाएंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा पश्चिम बंगाल में भाजपा संगठन को नए सिरे से सक्रिय करने की दिशा में पहला बड़ा कदम हो सकता है।
🚨 नितिन के बाद अमित शाह का बंगाल दौरा
नितिन नवीन के दिल्ली लौटने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 30 जनवरी को कोलकाता पहुंचेंगे। भाजपा सूत्रों के अनुसार—
- अमित शाह इस दौरे में कोई जनसभा नहीं करेंगे
- उनका पूरा कार्यक्रम संगठनात्मक बैठकों और चुनावी रणनीति पर केंद्रित रहेगा
सूत्रों का कहना है कि शाह का यह दौरा आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बेहद अहम है।
🗳️ विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मंथन
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा हो सकती है। ऐसे में अमित शाह का यह दौरा—
- टिकट वितरण की रणनीति
- संगठनात्मक पुनर्गठन
- बूथ स्तर पर मजबूती
- चुनावी नैरेटिव तय करने
जैसे अहम मुद्दों पर निर्णायक साबित हो सकता है।
पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि शाह के दौरे के बाद राज्य भाजपा की भविष्य की दिशा और रणनीति स्पष्ट रूप से सामने आ सकती है।











