पश्चिम बंगाल की चुनावी राजनीति में एक बड़ा और संवेदनशील खुलासा सामने आया है। निर्वाचन आयोग ने राज्य में लाखों मतदाताओं से जुड़ी दो अहम सूचियां सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है। इनमें एक ओर ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ (तथ्यगत असंगति) वाले मतदाताओं की सूची है, तो दूसरी ओर ‘नो-मैपिंग’ यानी ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की सूची शामिल है।
आयोग द्वारा बुधवार को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, 25 जनवरी को ये दोनों सूचियां सार्वजनिक की जाएंगी। इस फैसले को आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
📊 आंकड़ों में चौंकाने वाली सच्चाई
निर्वाचन आयोग के सूत्रों के अनुसार:
- 31,68,426 मतदाता ऐसे हैं जिनकी कोई स्पष्ट मैपिंग नहीं पाई गई है, यानी वे अनमैप्ड हैं
- 94,49,132 मतदाताओं के नामों में लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पाई गई है
इन आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह संख्या कई विधानसभा क्षेत्रों के कुल मतदाताओं से भी अधिक है।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत कार्रवाई
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी वाली सूची जारी की जा रही है। हालांकि अदालत ने ‘अनमैप्ड’ मतदाताओं की सूची प्रकाशित करने का आदेश नहीं दिया था, फिर भी आयोग ने पारदर्शिता के हित में इसे भी सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।
🗓️ 25 जनवरी से आपत्ति और दस्तावेज़ जमा करने की सुविधा
आयोग के अनुसार:
- 25 जनवरी से मतदाता अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से अपने दस्तावेज या आपत्ति दर्ज करा सकेंगे
- सुनवाई के दौरान माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण प्रमाणपत्र के साथ-साथ माध्यमिक का एडमिट कार्ड भी मान्य होगा
- सभी सूचियां पहले से ही जिलाधिकारी सह जिला निर्वाचन अधिकारी और ईआरओ के पास उपलब्ध हैं
इस प्रक्रिया को विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत पूरा किया जा रहा है।
🚨 आयोग की सख्त चेतावनी: कानून हाथ में लिया तो होगी कार्रवाई
एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हाल के दिनों में कुछ इलाकों में अशांति और अव्यवस्था की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए निर्वाचन आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है।
देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि:
“किसी भी परिस्थिति में कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
👮♂️ पुलिस-प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया
आयोग ने निर्देश दिया है कि:
- प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक पर्याप्त संख्या में बल और कर्मी तैनात करेंगे
- राज्य पुलिस के डीजी, कोलकाता पुलिस आयुक्त से लेकर हर जिले के एसपी और डीएम को विशेष निगरानी के आदेश
- एसआईआर से जुड़ा कार्य बिना किसी बाधा के और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा किया जाए
🗳️ चुनाव से पहले बड़ा कदम, बढ़ेगी पारदर्शिता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों को सार्वजनिक करना चुनावी पारदर्शिता की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। हालांकि, विपक्षी दल इसे लेकर सरकार और आयोग की मंशा पर सवाल भी उठा सकते हैं।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति का केंद्र बन सकता है।











