कोलकाता:
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल लाने वाला I-PAC और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) विवाद अब सीधे कोलकाता हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। I-PAC के दफ्तर पर ईडी की छापेमारी के बाद तृणमूल कांग्रेस, ईडी और I-PAC—तीनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान ईडी और टीएमसी के वकीलों के बीच जोरदार बहस देखने को मिली।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी, जबकि ईडी को नई याचिका दायर करने के लिए दो सप्ताह का समय दे दिया गया है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है।
🔎 क्या बोली ईडी अदालत में?
ईडी ने अदालत में दावा किया कि टीएमसी की याचिका पूरी तरह झूठी और निराधार है। जांच एजेंसी ने कहा कि याचिका पर हस्ताक्षर करने वाला व्यक्ति छापेमारी के दौरान मौके पर मौजूद ही नहीं था।
ईडी ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“छापेमारी के दौरान हमने कुछ भी जब्त नहीं किया। सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सहयोगी अपने साथ लेकर चले गए।”
ईडी ने यह भी आरोप लगाया कि छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी के काम में जानबूझकर बाधा डाली गई, और जब जांच चल रही थी, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।
ईडी का आरोप है कि जांच अधिकारियों को डराया-धमकाया गया, उन्हें बंधक बनाया गया, और उनके पास से मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और अहम दस्तावेज छीन लिए गए। एजेंसी ने इसे जांच को प्रभावित करने की सुनियोजित साजिश बताया है।
⚖️ हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत फिलहाल मामले की वैधता (Maintainability) पर विचार कर रही है, न कि उसके मेरिट्स पर।
अदालत ने यह भी कहा कि ईडी के मामले में तृणमूल कांग्रेस पक्षकार नहीं है, इसी आधार पर टीएमसी की याचिका खारिज कर दी गई।
साथ ही, ईडी को गलत आरोपों के खिलाफ नई याचिका दाखिल करने की अनुमति देते हुए दो हफ्ते का समय दिया गया है।
🗣️ TMC का पलटवार
टीएमसी ने अदालत में मांग की कि ईडी के उस बयान को रिकॉर्ड में लिया जाए, जिसमें एजेंसी ने कहा है कि छापेमारी के दौरान कुछ भी जब्त नहीं किया गया।
टीएमसी का आरोप है कि ईडी ने पार्टी के संवेदनशील और गोपनीय डेटा अपने कब्जे में ले लिया है, जिसमें छह साल पुराना राजनीतिक डेटा भी शामिल हो सकता है।
पार्टी ने आशंका जताई कि ईडी किसी राजनीतिक दल के साथ मिलकर झूठे आरोप गढ़ रही है।
🔥 मामला क्यों है इतना बड़ा?
गौरतलब है कि ईडी ने पिछले सप्ताह कोयला तस्करी मामले की जांच के तहत I-PAC के कार्यालय और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की थी।
ईडी का दावा है कि मनी लॉन्ड्रिंग जांच के दौरान राज्य मशीनरी ने सबूतों से छेड़छाड़ की और उन्हें नष्ट किया।
अब ईडी ने इस पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच की मांग कर दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मामला और भी तूल पकड़ सकता है।











