✓ SC में ED ने लगाए गंभीर आरोप, CM-DGP-CP के खिलाफ याचिका दायर, CBI जांच की मांग
कोलकाता/नई दिल्ली : चुनावी रणनीति बनाने वाली फर्म ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (I-PAC) के कोलकाता दफ्तर और कंपनी के निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। ED ने पश्चिम बंगाल सरकार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के DGP राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर की है।
केंद्रीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि 8 जनवरी 2026 को उसके वैधानिक सर्च ऑपरेशन में जानबूझ कर बाधा डाली गई, जांच को पटरी से उतारने की कोशिश की गई और सबूतों से छेड़छाड़ व उन्हें नष्ट किया गया। ED ने अपनी याचिका में कहा है कि यह सर्च ऑपरेशन धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत “रीजन टू बिलीव” दर्ज करने के बाद किया गया था। छापेमारी दो स्थानों पर हुई – कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास और विधाननगर के सेक्टर 5 स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड (IPAC) के दफ्तर में।
यह मामला ₹2,742.32 करोड़ के कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले से जुड़ा हुआ है। ED का दावा है कि इस घोटाले से जुड़े 20 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हवाला चैनलों के जरिए IPAC तक पहुंचाई गई। ED ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करीब 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के साथ प्रतीक जैन के आवास पर पहुंचीं और सर्च के दौरान ED अधिकारियों को रोका गया। आरोप लगाया कि जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और दस्तावेज जबरन छीनकर पुलिस कस्टडी में लगभग दो घंटे तक रखे गए।
ED का कहना है कि उनके अधिकारियों को धमकाया गया, पंचनामा की कार्यवाही प्रभावित हुई और जांच पूरी नहीं करने दी गई। इसके बाद दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के तहत कोलकाता के अलग अलग थानों में ED अधिकारियों के खिलाफ चार FIR दर्ज की गई। ED ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि कलकत्ता हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान सत्तारूढ़ दल के समर्थकों द्वारा कथित तौर पर भारी हंगामा किया गया, जिसके चलते न्यायालय ने माहौल को सुनवाई के लिए प्रतिकूल बताया। ED का तर्क है कि ऐसे हालात में हाईकोर्ट में वैकल्पिक उपाय प्रभावहीन हो गए हैं।
ED ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री, डीजीपी, पुलिस कमिश्नर और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की CBI जांच की मांग की है। एजेंसी का कहना है कि इन घटनाओं में BNS, 2023 के तहत चोरी, डकैती, आपराधिक अतिक्रमण, सरकारी कर्मियों के काम में बाधा, सबूत नष्ट करने और आपराधिक धमकी जैसे संज्ञेय अपराध बनते हैं। ED ने अंतरिम राहत के तौर पर अपने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक, किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई से सुरक्षा, और जब्त डिजिटल साक्ष्यों को सील कर सुरक्षित रखने व फॉरेंसिक संरक्षण की मांग की है। वहीं, IPAC ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर बयान जारी कर किसी भी राजनीतिक या चुनावी डेटा की जब्ती से इनकार किया है और जांच एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग का दावा किया है।











