अहमदाबाद : जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत के दो दिवसीय दौरे पर अहमदाबाद पहुंचे हैं। प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर चांसलर मर्ज 12–13 जनवरी 2026 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर है, यह उनकी भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज एक ही कार में सवार होकर साबरमती रिवरफ्रंट पहुंचे। यहां दोनों नेता अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव का उद्घाटन करेंगे।
सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी और जर्मन चांसलर के बीच सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों तक ही बात सीमित नहीं रहेगी। यूक्रेन संकट, वैश्विक सुरक्षा हालात और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ते तनाव जैसे विषयों पर भी चर्चा संभव है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया के कई हिस्सों में राजनीतिक और सैन्य उथल-पुथल देखी जा रही है।
जानें मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम
सोमवार, 12 जनवरी 2026
सुबह 9:30 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज का साबरमती आश्रम दौरा
इसके बाद सुबह 10:00 बजे अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में सहभागिता करेंगे।
उसके बाद सुबह 11:05 बजे महात्मा मंदिर में भारत-जर्मनी के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी।
वहीं दोपहर 12:20 बजे महात्मा मंदिर में ही प्रेस को संबोधित करेंगे।
दोपहर के कार्यक्रमों में 2:20 बजे ऐतिहासिक अडालज बावड़ी का दौरा शामिल है।
दिन का समापन शाम 5:30 बजे हाउस ऑफ एमजी में आयोजित कौशल विकास कार्यक्रम के साथ होगा।
मंगलवार, 13 जनवरी 2026
सुबह 8:15 बजे बंगलूरू के लिए प्रस्थान
सुबह 10:20 बजे – बंगलूरू आगमन (स्थान: केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा)
सुबह 11:20 बजे – बॉश कंपनी का दौरा (स्थान: अयप्पा गार्डन, अडुगोडी कैंपस)
दोपहर 1:30 बजे – नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग केंद्र (CeNSE) का दौरा (स्थान: सी. वी. रमन एवेन्यू)
दोपहर 3:25 बजे – बंगलूरू से प्रस्थान
पनडुब्बी सौदे पर क्यों टिकी हैं नजरें?
इस दौरे का सबसे बड़ा एजेंडा भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पनडुब्बियों की खरीद का प्रस्ताव है। यह सौदा करीब 52,500 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। इस करार के तहत जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स और भारत की माझगाव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के बीच साझेदारी हो सकती है। यह सौदा भारत की समुद्री ताकत को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
पनडुब्बी डील से भारत को क्या फायदा होगा?
स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय नौसेना की ताकत और क्षमता में इजाफा होगा।
मेक इन इंडिया को रक्षा क्षेत्र में मजबूती मिलेगी।
भारत को उन्नत जर्मन पनडुब्बी तकनीक मिलेगी।
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी।











