👉 कोयला तस्करी से जुड़ा मामला, धन शोधन से लेकर हवाला ट्रेडिंग जैसे गंभीर आरोप
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर केंद्र और राज्य के टकराव के केंद्र में आ गई है. प्रवर्तन निदेशालय की एक कार्रवाई ने न सिर्फ प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सियासी मोर्चे पर भी बयानबाजी को तेज कर दिया है. कोलकाता में प्रभावशाली राजनीतिक रणनीतिकार और IPAC के डायरेक्टर प्रतीक जैन के ठिकानों पर ED की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री का खुद मौके पर पहुंचना, इस पूरे घटनाक्रम को साधारण कानूनी प्रक्रिया से कहीं आगे ले गया. यह बताता है कि मामला सिर्फ जांच तक सीमित नहीं, बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे हैं.
राज्य में पहले से ही केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका को लेकर तनावपूर्ण माहौल है. ऐसे में मुख्यमंत्री ममता का जांच स्थल पर पहुंचना एक तरह से यह संकेत देता है कि तृणमूल कांग्रेस इस कार्रवाई को राजनीतिक दबाव के रूप में देख रही है. सत्तारूढ़ दल का मानना है कि चुनावी समय में इस तरह की छापेमारी संयोग नहीं हो सकती. यही वजह है कि यह मामला अब कानूनी दायरे से निकलकर खुले राजनीतिक संघर्ष का रूप ले चुका है.
प्रशांत किशोर भले ही हाल में बिहार विधानसभा चुनाव में अपनी पार्टी के साथ उतर चुके हों लेकिन साल 2013 में उन्होंने सिटीजन फॉर अकाउंटेबल गर्वनेंस नाम से एक कंपनी शुरू की थी, जो आई-पैक (I-PAC) यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (Indian Political Action Committee) के रूप में बदल गया. ऐसा नहीं है कि प्रशांत किशोर ने इस कंपनी को अकेले दम पर बड़ा मुकाम दिलाया. उनके साथ प्रतीक जैन, ऋषिराज सिंह और विनेश चंदेल कंपनी के को-फाउंडर्स हैं. पीके के बाद ये तीनों पढ़े-लिखे युवा आई-पैक के मुख्य स्तंभ हैं. हालांकि प्रशांत किशोर ने सक्रिय राजनीति में उतरने के साथ ही खुद को फर्म के पॉलिटिकल कंसल्टेंट वाले जुड़ाव से अलग कर लिया था. उन्होंने साल 2021 में खुद को इससे अलग कर लिया था. इसके बाद से I-PAC की कमान 3 अन्य बड़े पदाधिकारी संभाल रहे हैं, जिनमें प्रतीक जैन भी मुख्य हैं.
I-PAC की वेबसाइट पर दर्ज डिटेल की मानें तो पीके के हटने के बाद से ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन कंपनी के डायरेक्टर बन गए थे. प्रतीक जैन, IIT बॉम्बे के स्कॉलर हैं और वह भी चुनावी रणनीति में दिग्गज माने जाने लगे हैं. साल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद से I-PAC, TMC के साथ काम कर रही है. 2021 के विधानसभा चुनावों में टीएमसी की बड़ी जीत का श्रेय I-PAC को दिया जाता है.

प्रतीक जैन की बात करें तो वो बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले हैं. उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है. प्रतीक आई-पैक से जुड़ने से पहले डेलोएट इंडिया (Deloitte India) कंपनी में एनालिस्ट भी रह चुके हैं. ट्विटर पर सक्रिय रहने वाले प्रतीक आमतौर पर लोप्रोफाइल रहते हैं.
राजनीति और प्रशासन में प्रतीक जैन की बड़ी पकड़
IPAC के चीफ प्रतीक जैन को राज्य की राजनीति और प्रशासन में बड़ी पकड़ मानी जाती है. वह कई बार नवान्न (राज्य सचिवालय) जा चुके हैं और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिल चुके हैं. IPAC विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग सरकारी प्रोजेक्ट्स को लागू करने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार के बीच पुल का काम करता है. एक तरफ, जैसे IPAC नियमित रूप से एडमिनिस्ट्रेशन के टॉप अधिकारियों से बातचीत करता है, वैसे ही IPAC टीम भी रूलिंग पार्टी के टॉप लीडर्स में से एक अभिषेक बनर्जी और उनके ऑफिस के साथ करीबी रिश्तों और बातचीत के आधार पर काम करती है. IPAC की टीम विभिन्न विधानसभा केंद्रों में समीक्षा भी कर रही है. विधानसभा चुनाव में तृणमूल के कैंडिडेट कौन होंगे या किसे बाहर रखा जाएगा, यह तय करने में IPAC का रोल काफी अहम होता है.
कार्रवाई क्यों हो रही है?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कोयला चोरी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पड़ताल कर रही है. आरोप है कि घोटाले का धन I-PAC) तक भी पहुंचा है. ईडी के अनुसार, अनूप माझी और उनके साथियों ने कोयला चोरी से मिले काले धन को गोवा भेजा. यह पैसा 2022 के गोवा विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रचार के लिए I-PAC को दिया गया.
2022 के गोवा चुनाव में I-PAC ने ही टीएमसी के लिए चुनावी कैंपेन किया था. अनूप माझी की ओर से यह भुगतान टीएमसी के चुनावी काम के लिए किया गया था. ईडी की टीम ने I-PAC से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए. इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी और केंद्रीय एजेंसियों पर TMC के डॉक्यूमेंट्स चुराने का आरोप लगाया. ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को शरारती होम मिनिस्टर बताया. डॉक्यूमेंट ‘चोरी’ के आरोप के बाद, दफ्तर में मौजूद कुछ फाइलों को उठाकर ममता बनर्जी के काफिले की गाड़ी में रखा गया. वहीं, ईडी ने अब पुलिस-प्रशासन और मुख्यमंत्री पर साक्ष्य मिटाने और जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है.
जानिए I-PAC के बारे में
🔹I-PAC (Indian Political Action Committee) एक पॉलिटिकल कंसलटेंट फर्म है। इसके डायरेक्टर प्रतीक जैन है।
🔹यह राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति, डेटा-आधारित कैंपेन, मीडिया प्लानिंग और वोटर आउटरीच में मदद करती है।
🔹I-PAC पहले Citizens for Accountable Governance (CAG) थी। इसकी शुरुआत 2013 में प्रशांत किशोर ने प्रतीक के साथ की थी। बाद में इसका नाम I-PAC रखा गया।
🔹प्रशांत किशोर के हटने के बाद I-PAC की कमान प्रतीक के पास आ गई।
🔹प्रशांत ने बाद में बिहार में ‘जन सुराज’ पार्टी बनाई।
🔹I-PAC तृणमूल कांग्रेस (TMC) के साथ 2021 से जुड़ी है।












