चुनावी दंगल में ‘फेंसिंग’ बना मुद्दा, 10 रिमाइंडर देने पर भी नहीं मिली जमीन, 450 किमी खुला बॉर्डर

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👉 पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर ‘फेंसिंग’ के लिए जमीन अधिग्रहण सबसे बड़ी समस्या

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इस राज्य की सीमा से लगते बांग्लादेश बॉर्डर पर फेंसिंग का मुद्दा अब चुनावी दंगल में गहरा गया है। इस मुद्दे के केन्द्र में घुसपैठ है। इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक-दूसरे पर तीखा हमला बोला है।

बता दें कि ‘फेंसिंग’ के काम में सबसे बड़ी समस्या जमीन अधिग्रहण की बाधा है। केंद्र सरकार का आरोप है कि 10 रिमाइंडर देने पर भी ममता सरकार, फेंसिंग लगाने के लिए जमीन नहीं दे रही। पश्चिम बंगाल से लगता 450 किमी बॉर्डर पूरी तरह से खुला पड़ा है। पिछले 11 वर्ष में बांग्लादेश से लगती सीमा के विभिन्न हिस्सों पर 21000 बांग्लादेशी घुसपैठिये गिरफ्तार किए गए हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ के प्रयास …

साल घुसपैठ के प्रयास गिरफ्तार

2014 855 2160

2015 874 2809

2016 654 1601

2017 456 907

2018 420 884

2019 500 1109

2020 486 955

2021 703 1208

2022 857 2076

2023 746 2617

2024 977 2525

बांग्लादेश बॉर्डर पर 450 किलोमीटर के क्षेत्र में फेंसिंग नहीं

लोकसभा में ‘इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल’ 2025 पर चर्चा के दौरान बताया गया था कि पश्चिम बंगाल से लगते बांग्लादेश बॉर्डर पर 450 किलोमीटर के क्षेत्र में फेंसिंग नहीं हुई है। वजह, पश्चिम बंगाल सरकार, जमीन नहीं दे रही है। जब कभी फेंसिंग लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो टीएमसी के कार्यकर्ता गुंडागर्दी और धार्मिक नारेबाजी करने लगते हैं। पश्चिम बंगाल में 2216 किलोमीटर लंबी सीमा, बांग्लादेश से सटी हुई है। इसमें से 1653 किलोमीटर लंबे बॉर्डर पर फेंसिंग लग चुकी है। लगभग 563 किलोमीटर लंबा बॉर्डर आज भी खुला है। इसमें से 112 किलोमीटर क्षेत्र में नदी, नाले व ऊँचाई वाली जगह हैं। यहां पर भी फेंसिंग का प्रयास किया गया है, लेकिन 450 किलोमीटर क्षेत्र में फेंसिंग होना बाकी है।

लोकसभा में बताया गया था कि इसके लिए दस रिमाइंडर दिए गए हैं। इसके बाद भी पश्चिम बंगाल सरकार ने फेंसिंग के लिए जमीन नहीं दी। इस बाबत केंद्रीय गृह सचिव और बंगाल के मुख्य सचिव के बीच आधा दर्जन से ज्यादा बार मीटिंग हुई हैं। कई जगह ऐसी हैं, जब वहां फेंसिंग होती है तो सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ता हुड़दंग मचाने लगते हैं। बांग्लादेश के साथ पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्य की सीमा लगती है। इसमें से पश्चिम बंगाल की सीमा सबसे लंबी है। भारत-बांग्लादेश के बीच अंतरराष्ट्रीय सीमा की कुल लंबाई 4096.70 किलोमीटर है। इसमें से 3239.92 किलोमीटर, यानी 79.08 प्रतिशत क्षेत्र पर बाड़ लगाई गई है। इस सीमा पर 856.778 किलोमीटर क्षेत्र, मतलब 20.92 प्रतिशत, ये ऐसा इलाका है, जहां बाड़ नहीं लगी है।

2025 में घुसपैठ के प्रयास और गिरफ्तार

जनवरी 84 190

फरवरी 80 167

मार्च 110 243

अप्रैल 95 185

मई 54 110

जून 89 194

जुलाई 127 242

अगस्त 102 209

सितंबर 127 330

अक्तूबर 125 380

नवंबर 111 306

घुसपैठियों ने भारत में घुसने के लिए 7528 प्रयास किए

भारत-बांग्लादेश सीमा के सभी हिस्सों की बात करें तो 2014 से लेकर 2024 तक घुसपैठियों ने भारत में घुसने के लिए 7528 प्रयास किए हैं। इस वर्ष नवंबर तक ऐसे प्रयासों की संख्या 1104 रही है। 11 साल में घुसपैठ के कुल 8632 प्रयास किए गए। 2014 से लेकर 2024 तक बॉर्डर पार करने का प्रयास करने वाले 18851 घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया है। इस वर्ष 2556 घुसपैठिये गिरफ्तार किए गए। ऐसे में पिछले 11 वर्षों के दौरान 21407 घुसपैठियों को पकड़ा गया है। संसद के शीतकालीन सत्र में पूछे गए एक सवाल के जवाब में गृह मंत्रालय की तरफ से बताया गया था कि भारत और बांग्लादेश के बीच अभी तक 856 किमी लंबा हिस्सा ऐसा है, जो खुला है। यानी वहां पर ‘बाड़’ नहीं लगी है।

कलकत्ता हाई कोर्ट भी कर चुकी है हस्तक्षेप

कलकत्ता हाई कोर्ट भी इस मामले में हस्तक्षेप कर चुकी है। खंडपीठ ने बंगाल सरकार को बांग्लादेश के साथ राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर कांटेदार बाड़ लगाने के मुद्दे पर अपनी टिप्पणियों का विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था, जहां अभी तक बाड़ नहीं लगी है।

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कोर्ट यह निर्देश बंगाल में बांग्लादेश के साथ बिना बाड़ वाली अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तत्काल कांटेदार बाड़ लगाने की मांग वाली जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिया।

पीठ के आदेश के अनुसार, राजय सरकार को अपने हलफनामे में यह बताना होगा कि बिना बाड़ वाली सीमाओं पर कांटेदार बाड़ लगाने के लिए जमीन केंद्रीय गृह मंत्रालय को क्यों नहीं सौंपी गई, जबकि गृह मंत्रालय ने अधिग्रहण की पूरी लागत का भुगतान कर दिया था। खंडपीठ ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार के हलफनामे पर आपत्ति होने की स्थिति में, केंद्र सरकार को अपने तर्क प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।

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