कोलकाता : पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित स्कूल भर्ती घोटाले मामले में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी आखिरकार जेल से रिहाहो गए। तीन साल और तीन माह बाद उनकी रिहाई हुई है। मंगलवार को जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने नाकतला स्थित अपने विजयनिकेतन आवास में कदम रखा। बता दें कि कोलकाता की एक अदालत में आठ गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद उनकी जमानत की प्रक्रिया शुरू हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही अगस्त में उन्हें जमानत दे दी थी, लेकिन रिहाई की शर्त गवाहों के बयान पूरे होने पर निर्भर थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को पार्थ चटर्जी को सीबीआई जांच वाले इस मामले में जमानत देते हुए कहा था कि उन्हें तभी रिहा किया जाएगा जब ट्रायल कोर्ट ‘महत्वपूर्ण गवाहों’ के बयान दर्ज कर ले। कोर्ट ने यह भी कहा था कि तीन साल तक जेल में रहने के बाद अब उनकी निरंतर हिरासत ‘न्याय के साथ अन्याय’ होगी।
रिहाई की प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
पार्थ चटर्जी के वकीलों ने अदालत को बताया कि अब जब गवाहों की परीक्षा पूरी हो चुकी है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। अदालत द्वारा बेल बॉन्ड पास होते ही चटर्जी की रिहाई हो गई। बताया जा रहा है कि चटर्जी अस्पताल में भर्ती थे और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें रिहा कर दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई द्वारा दर्ज मामले में पार्थ चटर्जी और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों पर सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के शिक्षकों और ग्रुप ‘सी’ कर्मचारियों की भर्ती में भारी अनियमितताओं के आरोप हैं। यह घोटाला तब सामने आया जब बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने स्कूल सर्विस कमीशन (एसएससी) पर पैसे लेकर नौकरी देने का आरोप लगाया था।
अन्य आरोपी और कोर्ट की टिप्पणी
इस मामले में चटर्जी के अलावा एसएससी के पूर्व चेयरमैन सुबीर भट्टाचार्य और सलाहकार समिति के पूर्व अध्यक्ष एस.पी. सिन्हा भी आरोपी हैं। अदालत ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप चार सप्ताह के भीतर तय किए जाएं और दो महीने में गवाहों के बयान दर्ज हों।
पार्थ चटर्जी को जुलाई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार किया था और बाद में अक्तूबर 2024 में सीबीआई ने भी उन्हें हिरासत में लिया था। ईडी के अन्य मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है।











