बालू तस्करी : अरुण सर्राफ के कारनामे देख ED भी हतप्रभ, 209 करोड़ के गबन का खुलासा

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*जीडी माइनिंग का था एकमात्र लक्ष्य- जितनी ज़्यादा धोखाधड़ी, उतना ज़्यादा पैसा

कोलकाता : जीडी माइनिंग के मालिक अरुण सर्राफ और उनकी कंपनी ने बालू खदान से सरकारी धन का गबन एक योजनाबद्ध तरीक़े से किया है! केंद्रीय जाँच एजेंसी ED का दावा है कि हर तरह की धोखाधड़ी की गई है। ईडी ने गुरुवार रात रेत तस्करी मामले में पहले आरोपी के तौर पर अरुण सर्राफ को गिरफ़्तार किया। उससे लगातार पूछताछ के बाद, ईडी के हाथ कई सनसनीखेज जानकारियाँ लगी हैं।

डब्ल्यूबीएमडीटीसीएल के सभी नियमों की अनदेखी

केंद्रीय जाँचकर्ताओं का कहना है कि अरुण सर्राफ ने पश्चिम बंगाल रेत (खनन, परिवहन, भंडारण और बिक्री) या डब्ल्यूबीएमडीटीसीएल के सभी नियमों की लगभग अनदेखी की है और रेत का खनन और बिक्री करके भारी मुनाफ़ा कमाया है। शुक्रवार को उन्हें ईडी की विशेष अदालत में पेश किया और 13 दिनों की हिरासत की अर्ज़ी दी। दूसरी ओर, अरुण के वकील ने उनकी ज़मानत की अर्ज़ी नहीं लगाई।

फर्जी परमिट और ई-चालान से चलाया गोरखधंधा

विदित रहे कि रेत खनन से लेकर बिक्री तक, हर चीज़ के लिए डब्ल्यूबीएमडीटीसीएल के सरकारी पोर्टल से प्राप्त आंतरिक परमिट और सड़क चालान की जरूरत होती है। लेकिन अरुण सर्राफ और उनकी कंपनी जीडी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड ने बिना सरकारी परमिट और रोड ई-चालान के लाखों घन फीट रेत का खनन और बिक्री की है। कंपनी के अकाउंटेंट के बयान में सनसनीखेज जानकारी सामने आई है।

अकाउंटेंट ने किया अरुण के कारनामों का खुलासा

ईडी अधिकारियों का दावा है कि अकाउंटेंट ने ईडी को बताया कि अरुण सर्राफ की जिस कंपनी से रेत का खनन किया गया, वहाँ कोई स्टॉक रजिस्ट्रार नहीं था, केवल एक्सेल शीट में रिकॉर्ड रखे जाते थे। यह काम सरकार को देय रॉयल्टी का भुगतान किए बिना और सरकारी पोर्टल से जारी चालान के बिना अवैध रूप से किया गया था।

130 करोड़ रुपए अवैध जमा किए, 79 करोड़ की हेराफेरी

ईडी का दावा है कि अरुण की कंपनी जीडी माइनिंग ने दिसंबर 2024 से मार्च 2025 तक लगभग 19 लाख घन फीट रेत अवैध रूप से बेची। इसमें अरुण ने कम से कम 79 करोड़ सरकारी रुपयों का गबन किया। ईडी का यह भी आरोप है कि इस कंपनी के बैंक खातों में भी विसंगतियां हैं। पता चला है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में कंपनी ने बैंक में 130 करोड़ रुपये जमा किए थे। लेकिन रेत बेचकर बैंक में 103 करोड़ रुपये जमा किए गए।

अरुण के वकील ने जमानत के लिए नहीं किया आवेदन

शुक्रवार को ईडी ने अरुण सर्राफ की 13 दिनों की हिरासत के लिए आवेदन किया। न्यायाधीश ने जाँच अधिकारी से पूछा कि क्या कोई केस डायरी है। तब अरुण के वकील ने कहा, “हम किसी ज़मानत के लिए आवेदन नहीं कर रहे हैं।” ईडी ने अदालत में दलील दी कि रेत खनन और बिक्री के लिए सरकारी ई-चालान ज़रूरी है। लेकिन उन्होंने वह चालान नहीं लिया, बल्कि खुद ही फ़र्ज़ी चालान बनाकर बेच दिए।

पूरी योजना के साथ दिया गया सरकार को धोखा

पूरी योजना के साथ सरकार को धोखा देकर सरकारी धन का गबन किया गया। बिना रिकॉर्ड रखे रेत बेची गई ताकि पूरा पैसा गबन किया जा सके – यही उनका लक्ष्य था। ईडी ने आरोप लगाया कि जीडी माइनिंग दो वित्तीय वर्षों में कुल 60 करोड़ रुपये की राशि का स्पष्टीकरण नहीं दे पाई। जाँचकर्ताओं को उम्मीद है कि अरुण सर्राफ के पकड़े जाने से रेत तस्करी का मामला जल्द ही सुलझ जाएगा। ईडी अब अरुण के साथ किसी तरह से जुड़े बालू कारोबारी की कुंडली खंगालने में जुट गई है।

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