कोलकाता/सिलीगुड़ी : उत्तर बंगाल में भारी बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही का मंजर कायम कर दिया है। हालात अब भयावह और डरावने बन चुके हैं। कुदरत के कहर से दार्जिलिंग, मिरिक और डुवार्स में भारी तबाही हुई है। 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में रेड अलर्ट जारी किया गया है। भूटान द्वारा हाइड्रोपावर डैम से पानी छोड़े जाने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृतकों के परिजनों को मुआवजे की घोषणा की है। सिर्फ दार्जिलिंग जिले में 20 लोगों की मौत हुई, जबकि सीमा पर नेपाल के गांवों और जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में पांच-पांच लोग मारे गए। मौसम विभाग ने दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जिलों के लिए सोमवार तक रेड अलर्ट जारी किया है। चेताया है कि पहाड़ी इलाकों में मिट्टी ढीली होने के कारण भूस्खलन हो सकते हैं।
बता दें कि उत्तर बंगाल में भारी बारिश से बाढ़ आ गई है. कई सड़कें जलमग्न हो गई हैं. सड़कें और पुल टूट गए हैं. नागराकाटा और बानरहाट जैसी कई जगहें जलमग्न हैं।

सेना और एनडीआरएफ के जवानों ने संभाला मोर्चा
इससे भी बदतर, मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश से उठा एक तूफान पूर्व की ओर बढ़ गया है और अब डूआर्स क्षेत्र के मदारीहाट की ओर भी बढ़ रहा है. अगर भूटान की पहाड़ियों में भारी बारिश होती है, तो उत्तर बंगाल की नदियों में तेजी से उफान आने की आशंका है, जिससे अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ जाएगा। इस बीच, एनडीआरएफ ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग उपखंड के बारिश से प्रभावित मिरिक क्षेत्र में कई टीमें तैनात की हैं, जहां मूसलाधार बारिश के कारण बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ है, जिसमें कई लोग मारे गए हैं और कई गांव बाकी क्षेत्र से कट गए हैं। एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) मोहसेन शाहेदी ने कहा कि दार्जिलिंग, सिलीगुड़ी और अलीपुरद्वार से तीन टीमें पहले ही तैनात की जा चुकी हैं, जबकि मालदा और कोलकाता से एक-एक, दो और टीमें प्रभावित स्थलों के लिए रवाना हो गई हैं। सेना, एनडीआरएफ और पुलिस के जवान बचाव कार्य में उतर चुके हैं।
छुट्टी में गये कर्मियों को वापस बुलाया

भूटान के राष्ट्रीय जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान केंद्र (एनसीएचएम) ने कहा कि ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्पोरेशन (डीजीपीसी) ने बांध के गेटों में खराबी की सूचना दी है, जो नहीं खुल पाए, जिसके परिणामस्वरूप नदी का पानी बांध के ऊपर फैल गया. भूटान ने संभावित प्रभावों के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को औपचारिक रूप से तैयार रहने के लिए सतर्क कर दिया है। भारत के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) ने कहा कि अलीपुरद्वार स्थित उसकी टीम को “उच्चतम अलर्ट स्तर” पर रखा गया है। छुट्टी पर गए सभी कर्मियों को वापस बुला लिया गया है, जबकि सिलीगुड़ी से अतिरिक्त 15 बचावकर्मियों को ज़मीनी कार्रवाई को मजबूत करने के लिए तैनात किया गया है।
मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने क्षेत्र में फंसे हुए हजारों पर्यटकों को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था करेगी और पर्यटकों से अपील की कि वे घबराएं नहीं और वहां से निकलने की जल्दबाजी न करें. उन्होंने कहा, ‘कई पर्यटक फंसे हुए हैं. मैं उनसे अनुरोध करती हूं कि वे हड़बड़ी न करें. कृपया जहां हैं वहीं रहें. होटल वालों को उनसे ज्यादा पैसे नहीं लेने चाहिए. उनकी सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और प्रशासन यह सुनिश्चित करेगा’. सीएम ने घोषणा की कि आपदा में मारे गए लोगों के परिवारों को सरकारी मुआवजा और उनके एक सदस्य को रोजगार मिलेगा. हालांकि उन्होंने राशि का जिक्र नहीं किया.
पीएम मोदी ने हर संभव मदद का दिया भरोसा
इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मौतों पर शोक व्यक्त किया है. उन्होंने कहा है कि भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. पीएम ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘दार्जिलिंग में पुल दुर्घटना में हुई जानमाल की हानि से बहुत दुःख हुआ है. जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है. घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं. भारी बारिश और भूस्खलन के मद्देनजर दार्जिलिंग और आसपास के इलाकों की स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है. हम प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं’.

मौत का आंकड़ा बढ़ने की आशंका
NDRF और जिला प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार, कई स्थानों – सरसली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती, धार गांव (मेची), नागराकाटा और मिरिक झील क्षेत्र से लोगों के मारे जाने की खबर है. उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने जान-माल के नुकसान को दुखद बताते हुए कहा कि हालात बेहद चिंताजनक हैं. उन्होंने बताया कि मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है. मंत्री ने ये भी बताया कि वो भी इलाके का दौरा करने जा रहे हैं।
उत्तर बंगाल में कितनी बारिश?
कुर्ती, जलपाईगुड़ी- 370 मिमी
डायना, जलपाईगुड़ी- 344 मिमी
बानरहाट, जलपाईगुड़ी- 310 मिमी
गजोल्डोबा, जलपाईगुड़ी- 302 मिमी
मेखलीगंज, कूचबिहार- 264 मिमी
दार्जिलिंग- 261 मिमी
नेओरा, जलपाईगुड़ी- 245 मिमी
लावा, कलिम्पोंग- 202 मिमी
बिजनबाड़ी, दार्जिलिंग- 154 मिमी











