आसनसोल/नई दिल्ली।
जहाँ देशभर में स्वतंत्रता दिवस पर बड़े-बड़े समारोह और परेड आयोजित होते हैं, वहीं इस साल कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने एक अलग मिसाल कायम की। इस पहल का उद्देश्य था कि आज़ादी का असली जश्न सिर्फ़ कुछ वर्गों तक सीमित न रहकर उन वंचित, बेघर और आश्रयहीन लोगों तक पहुँचे जो अक्सर इन उत्सवों से दूर रह जाते हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई, जहाँ झुग्गी बस्तियों और आश्रय गृहों में रहने वाले लोग गर्व से तिरंगे के नीचे खड़े हुए। राष्ट्रगान की गूंज ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया। आयोजन के दौरान बच्चों को तिरंगे झंडे, रंग-बिरंगे गुब्बारे और मिठाइयाँ बाँटी गईं। वहीं महिलाओं को साड़ी और कपड़े, और बुजुर्गों को ज़रूरी सामान उपलब्ध कराया गया।
इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि आज़ादी का मतलब केवल अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी को सम्मान और खुशियाँ बाँटने का नाम है। ऐसे प्रयासों से समाज में समानता और एकता का संदेश फैलता है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह दिन उनके लिए बेहद ख़ास बन गया। एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा – “आज पहली बार लगा कि स्वतंत्रता दिवस सिर्फ़ अमीरों का नहीं, हमारा भी है।”
यह छोटा लेकिन दिल को छू लेने वाला प्रयास इस संदेश के साथ समाप्त हुआ कि सच्ची देशभक्ति वही है जिसमें हम सबके चेहरों पर मुस्कान ला सकें।











