आसनसोल, पश्चिम बंगाल –
सोमवार को बर्नपुर का त्रिवेणी मोड़ युद्धभूमि में तब्दील हो गया जब भाजपा कार्यकर्ता विधायक अग्निमित्रा पाल के सम्मान में सड़कों पर उतर आए। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित अभद्र टिप्पणी से आक्रोशित भाजपा नेत्राओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और घंटों रास्ता जाम रखा।
⚠️ क्या हुआ त्रिवेणी मोड़ पर?
- सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं ने मिठाई बाबू के खिलाफ नारेबाज़ी की।
- त्रिवेणी मोड़ पर घंटों तक ट्रैफिक पूरी तरह ठप रहा।
- प्रदर्शन रोकने गई पुलिस से धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई।
- स्थिति काबू में करने के लिए पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
🗣️ भाजपा की मांग:
भाजपा नेताओं का कहना है कि:
“अग्निमित्रा पाल पर की गई सोशल मीडिया टिप्पणी न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली है।
यदि आरोपी के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को राज्यव्यापी बना दिया जाएगा।”
🚨 सड़क पर जनता हुई परेशान:
- घंटों तक आवागमन प्रभावित
- स्कूल, दफ्तर जाने वालों को भारी परेशानी
- आम जनता ने जताई नाराजगी
💬 नेत्री का सम्मान या अभिव्यक्ति की आज़ादी?
इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि सोशल मीडिया की आज़ादी की सीमा क्या होनी चाहिए?
क्या किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ अशोभनीय भाषा का उपयोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, या कानूनन दंडनीय अपराध?
🧭 आगे क्या?
- पुलिस मामले की जांच में जुटी
- भाजपा की चेतावनी: जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र होगा
- स्थानीय प्रशासन तनावग्रस्त इलाकों पर नज़र बनाए हुए है
🧾 निष्कर्ष:
“एक टिप्पणी ने पूरे शहर को हिला दिया। अग्निमित्रा पाल पर अभद्रता के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि नेताओं के सम्मान की रक्षा की हुंकार है। सवाल ये है – सोशल मीडिया की आज़ादी कितनी जायज़?”










