📍अलीपुरद्वार, पश्चिम बंगाल:
एनआरसी (NRC) को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल आ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में एक जनसभा में दावा किया था कि फालाकाटा की बंगालीभाषी महिला अंजली शील को एनआरसी नोटिस भेजा गया है। उन्होंने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एनआरसी के नाम पर बंगालियों को डराया जा रहा है।
लेकिन इस पूरे मामले में नया मोड़ तब आया जब खुद अंजली शील सामने आईं और मीडिया से बातचीत में साफ कहा — “मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है।”
🔍 मीडिया से पता चला, कोई सरकारी सूचना नहीं
अंजली शील ने बताया कि उन्हें इस पूरे विवाद के बारे में पहली बार तब पता चला जब अलीपुरद्वार से एक मीडिया कर्मी ने उन्हें कॉल किया। उन्होंने कहा,
“कल मीडिया से कॉल आया तो मुझे पहली बार पता चला कि मेरा नाम इस मामले में घसीटा जा रहा है। मुझे अब तक किसी भी प्रकार का कोई सरकारी नोटिस नहीं मिला है।”
❓ “मीडिया के पास कैसे पहुंचा नोटिस?”
25 वर्षों से फालाकाटा में रह रही अंजली शील ने सवाल उठाया कि अगर कोई नोटिस होता भी, तो वो पहले प्रशासन या पुलिस के पास होना चाहिए था, न कि मीडिया में वायरल होना चाहिए था।
“अगर मेरे नाम से कोई सरकारी नोटिस है, तो वह पहले पुलिस या चुनाव आयोग के पास होना चाहिए। मीडिया के पास वह कैसे आया?” — उन्होंने सवाल उठाया।
🏠 असम की बेटी, बंगाल की बहू
अंजली शील असम के धुबरी ज़िले की मूल निवासी हैं। उनकी शादी फालाकाटा में हुई थी और वे तब से यहीं रह रही हैं। उनका कहना है कि उनके पिता का घर अब भी असम में है, लेकिन उनकी नागरिकता या पहचान को लेकर कभी कोई सवाल नहीं उठे थे।
🔥 राजनीतिक तूफान: BJP की मांग और TMC का विरोध
यह विवाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया की पृष्ठभूमि में खड़ा हुआ है, जो चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची में सुधार के लिए चलाई जा रही है। बीजेपी इस प्रक्रिया को “अवैध घुसपैठियों की पहचान का माध्यम” बता रही है, जबकि तृणमूल कांग्रेस इसे “एनआरसी का छिपा एजेंडा” कह रही है।
🧠 राजनीतिक विश्लेषण:
- ममता बनर्जी इस मुद्दे को राज्य में बंगाली पहचान से जोड़कर पेश कर रही हैं।
- BJP इसे सीमा सुरक्षा और अवैध नागरिकता से जोड़ रही है।
- अंजली शील का बयान TMC के दावे को कमजोर कर सकता है।
- मामला अब कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है।










