दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल: कोक ओवन थाना क्षेत्र के डीपीएल शालबागान इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां कथित रूप से कोयला माफिया गरीब और मजबूर किशोरों को बहला-फुसलाकर रेल वैगनों से कोयला चोरी करवाते हैं। इसी खतरनाक काम के दौरान 15 वर्षीय सुरजीत रुईदास की जान चली गई।
⚡ 20 रुपये के लालच में गई जान
रविवार को कुछ अज्ञात लोगों ने सुरजीत को बुलाकर ले गए थे। परिवार का आरोप है कि उसे कोयला वैगन से कोयला निकालने के लिए ले जाया गया, और वहीं ऊपर से गुज़र रही हाई वोल्टेज बिजली की तार की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई।
सोमवार रात सुरजीत के परिजनों को यह सूचना मिली कि उसका शव कोलकाता के बालीगंज में एक वैगन में मिला है। इस सूचना के बाद पूरे शालबागान इलाके में कोहराम मच गया।
🔥 इलाके में विरोध और आक्रोश
जैसे ही यह ख़बर फैली, स्थानीय लोगों ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। एक घर को निशाना बनाकर उसका दरवाजा तोड़ने की कोशिश भी की गई। आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि कोयला चोरी का यह गिरोह सत्तारूढ़ पार्टी के संरक्षण में फल-फूल रहा है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है।
लोगों का यह भी कहना है कि जब वे कोक ओवन थाने में सुरजीत की गुमशुदगी की शिकायत लेकर पहुँचे थे, तो पुलिस ने सहयोग नहीं किया।
🛤️ रेलवे वैगन बना मौत का जाल
शालबागान इलाका दुर्गापुर रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। सिग्नल न मिलने पर यहां मालगाड़ियाँ अक्सर रुकती हैं। इस मौके का फायदा उठाकर अपराधी अवैध रूप से कोयला उतारते हैं, जिसमें किशोरों को सिर्फ 20-30 रुपये में इस्तेमाल किया जाता है। यही लालच 15 वर्षीय सुरजीत की मौत का कारण बन गया।
📣 जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना की निष्पक्ष जांच और कोयला माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि दोषियों को जल्द सज़ा नहीं दी गई, तो क्षेत्र में बड़ा जन आक्रोश फूट सकता है।
🔴 यह सिर्फ एक मौत नहीं, सिस्टम पर सवाल है।
सुरजीत की मौत ने एक बार फिर यह उजागर कर दिया है कि गरीबी और अपराध के गठजोड़ ने समाज के सबसे कमजोर वर्ग को किस हद तक शोषित कर डाला है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार और पुलिस इस माफिया तंत्र को खत्म कर पाएगी?










