होकरों पर जुल्म या प्रशासन की मनमानी? आसनसोल में उबाल!

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आसनसोल:
आसनसोल रेलवे स्टेशन एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया, जब बुधवार को तृणमूल श्रमिक संगठन INTTUC ने स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या 7 के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन होकरों पर हो रहे कथित जुल्म और उनकी रोज़ी-रोटी पर संकट के विरोध में किया गया।

इस आंदोलन का नेतृत्व INTTUC के वरिष्ठ नेता राजू अहलूवालिया ने किया। उन्होंने कहा—

“रेल पुलिस जबरन होकरों को हटाकर उन पर झूठे केस कर रही है, मारपीट तक की जा रही है। यह लोकतंत्र में अस्वीकार्य है।”

💬 क्या है मामला?

  • स्टेशन परिसर में लंबे समय से होकर अपना रोजगार कर रहे हैं।
  • पुलिस उन पर अवैध कब्जा, अतिक्रमण जैसे आरोप लगाकर कार्रवाई कर रही है।
  • कई होकरों को एफआईआर, मारपीट और उपकरण जब्ती का सामना करना पड़ा है।

⚠️ क्या बोले नेता?

राजू अहलूवालिया ने कहा कि यह केवल विरोध नहीं, बल्कि “रोज़गार बचाओ आंदोलन” है। उन्होंने चेताया कि अगर रेलवे ने कार्रवाई नहीं रोकी तो वे रेल रोक आंदोलन तक करेंगे।

🧾 रेल प्रशासन की चुप्पी

अब तक रेल प्रशासन की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस चुप्पी ने सवालों को और गहरा कर दिया है।

🔍 पृष्ठभूमि:

रेलवे के कई स्टेशनों पर हो रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के चलते हजारों छोटे विक्रेता प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, तृणमूल समर्थित INTTUC का यह पहला बड़ा सार्वजनिक विरोध है, जिसमें रेलवे के अधिकारियों पर सीधा हमला बोला गया है।

🎯 निष्कर्ष:

यह मामला अब सिर्फ प्रशासन बनाम होकरों का नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। आने वाले दिनों में यदि बातचीत न हुई तो आसनसोल स्टेशन संघर्ष की जंगभूमि बन सकता है।

📣 “क्या प्रशासन रोज़गार को रौंद रहा है या कानून व्यवस्था को लागू कर रहा है? यह आने वाला समय तय करेगा।”

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