जयपुर के सदर थाना पुलिस हिरासत में हुई 28 वर्षीय युवक मनीष पांडे की रहस्यमयी मौत ने राजस्थान की राजनीति और पुलिस प्रशासन में हलचल मचा दी है। मौत के बाद एसएमएस अस्पताल की मोर्चरी पर परिजनों और सामाजिक संगठनों द्वारा धरना प्रदर्शन किया गया, जिसे सिविल लाइंस से विधायक गोपाल शर्मा की समझाइश और प्रशासन से वार्ता के बाद सिर्फ दो घंटे में समाप्त कर दिया गया।
🧎♂️ धरने पर बैठे परिवार को मिला न्याय का भरोसा
विधायक गोपाल शर्मा ने मोर्चरी पहुंचकर मृतक मनीष पांडे के परिजनों से मुलाकात की और मामले में उच्चाधिकारियों से तुरंत बात की। वार्ता के बाद यह सहमति बनी कि मृतक परिवार को:
- आर्थिक सहायता दी जाएगी,
- परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिलेगी,
- मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाएगी,
- दोषी पुलिसकर्मी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
🧑⚖️ सामाजिक संगठनों ने जताया आक्रोश
धरने की अगुवाई कर रहे विप्र महासभा के संस्थापक सुनील उदेइया और परशुराम सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनिल चतुर्वेदी ने इस घटना को पुलिसिया बर्बरता का नमूना बताते हुए न्यायिक जांच की मांग की थी। उनके साथ महामंत्री जितेंद्र मिश्रा, देवेंद्र शर्मा समेत कई समाजसेवी और कार्यकर्ता मौजूद थे।
👨👩👧 मनीष पांडे की कहानी: एक परिवार उजड़ गया
मनीष मूलतः उत्तर प्रदेश का रहने वाला था, जो जयपुर के मांग्यावास क्षेत्र में अपनी पत्नी और दो बेटियों के साथ किराए पर रह रहा था। शुक्रवार को वाहन चोरी के संदेह में पुलिस ने उसे पकड़ा, और शनिवार को सदर थाने में एचएम ऑफिस के पास पूछताछ के दौरान उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
पुलिस का दावा है कि मनीष ने तौलिए से पाइप में फांसी लगाकर आत्महत्या की। मगर परिजनों का आरोप है कि यह हिरासत में हत्या है, जिसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की जा रही है।
🧵 आगे क्या?
अब सवाल उठता है कि क्या यह मामला भी अन्य हिरासत मौतों की तरह दबा दिया जाएगा, या फिर सच सामने लाया जाएगा? फिलहाल, सरकार की ओर से पोस्टमार्टम के बाद रिपोर्ट आने तक जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लेकिन इस घटना ने राजस्थान पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं।










