आसनसोल | 3 जून 2025
देश की जीवनरेखा कहे जाने वाले रेलवे के कर्मचारियों ने आज केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ ड्यूरंड हॉल, आसनसोल में एकजुट होकर बिगुल बजा दिया। Eastern Railwaymen’s Union (ERMU) की Democratic Youth & Women’s Wing द्वारा आयोजित इस सेमिनार में कॉमरेड अमित कुमार घोष, महासचिव, ERMU ने उद्घाटन किया और सरकार को दो टूक संदेश दिया – “रेलवे कर्मचारियों की उपेक्षा अब नहीं सहेंगे!”
🔥 “रेल निजी हाथों में नहीं जाएगी” – गूंजा आसनसोल हॉल
कॉमरेड घोष ने कहा:
“रेलवे सिर्फ पटरी पर नहीं, देश की अर्थव्यवस्था पर भी चलती है।
सरकार द्वारा निजीकरण, ठेका प्रथा और श्रम सुधारों की आड़ में जो खेल हो रहा है,
वह सीधे-सीधे कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर हमला है। हमें एकजुट होकर आवाज बुलंद करनी होगी।”
🗳️ सेमिनार में पारित हुए अहम प्रस्ताव:
- रेलवे के निजीकरण के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन
- स्थायी भर्ती प्रणाली की पुनर्बहाली
- महिला रेलकर्मियों के लिए बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा
- ठेका प्रथा के खिलाफ संयुक्त श्रमिक अभियान
- हर मंडल में विरोध रैली और जनजागरूकता अभियान शुरू करना
👩🔧 युवा और महिला कर्मचारियों की भागीदारी से सेमिनार में नया जोश
इस आयोजन में रेलवे के विभिन्न विभागों से आए युवा और महिला कर्मचारियों की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कई युवा वक्ताओं ने भी मंच से सरकार की नीतियों पर करारा प्रहार किया।
एक महिला रेलकर्मी ने कहा:
“हमसे सेवा तो ली जाती है, लेकिन अधिकार नहीं दिए जाते।
ये सेमिनार नहीं, अब संघर्ष की शुरुआत है।”
📸 सेमिनार से सीधे तस्वीरें – तख्तियों पर लिखा था: “रेल नहीं बिकेगी!”
सेमिनार के दौरान मौजूद कार्यकर्ताओं ने हाथों में तख्तियां ली हुई थीं, जिन पर लिखा था:
👉 “रेल बेचने वालों होश में आओ”
👉 “निजीकरण नहीं चलेगा”
👉 “ठेका नहीं, स्थायी रोजगार दो”
🧠 विश्लेषण: क्या ये आंदोलन भविष्य की रेलवे नीति बदल सकता है?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, रेलवे कर्मचारियों की यह एकजुटता और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ा सकती है। यदि इसी रफ्तार से कर्मचारी लामबंद होते रहे, तो सरकार को भी श्रम नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।













