📍 दुर्गापुर, पश्चिम बंगाल:
ममता और इंसानियत की मौत की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है दुर्गापुर के सिटी सेंटर से। 81 वर्षीय वृद्ध सुबोध रंजन आचार्य की भूख और बीमारी से तड़प-तड़पकर मौत हो गई। आरोप है कि उनका इकलौता बेटा, जो रेलवे कर्मचारी है और कोलकाता के बाली इलाके में आलीशान फ्लैट में रहता है, कभी अपने पिता की खोज-खबर लेने नहीं आया।
🧓 पिता की पीड़ा, समाज का सवाल
स्वर्गीय सुबोध बाबू मिश्र इस्पात कारखाने के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। वह दुर्गापुर सिटी सेंटर के सेल को-ऑपरेटिव इलाके के मधुसूदन दत्त पथ स्थित घर में अकेले रहते थे। पिछले कुछ वर्षों से वह बीमार चल रहे थे।
🏥 इलाज कराया पड़ोसियों ने, बेटा बना रहा बेपरवाह
स्थानीय लोगों ने बताया कि
“बेटा तो कभी आता नहीं था, हमने मिलकर वृद्ध के लिए डॉक्टर बुलाए, खाना दिया। लेकिन आखिरकार उनका शरीर जवाब दे गया।”
😢 भूख, बीमारी और तिरस्कार – एक त्रासदी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर बेटे ने थोड़ा भी ध्यान दिया होता, तो शायद सुबोध बाबू की जान बचाई जा सकती थी। वे कई दिनों से भूखे थे, और धीरे-धीरे उनकी हालत खराब होती गई।
📸 सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा
इस घटना की जानकारी जब सोशल मीडिया पर फैली, तो लोगों ने बेटे की निंदा करते हुए इंसानियत की हार बताया। कई लोगों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की और वृद्धजन सुरक्षा कानूनों को सख्ती से लागू करने की बात कही।










