कोलकाता। 2026 का विधानसभा चुनाव भले ही एक साल दूर हो, लेकिन बंगाल की राजनीति अभी से गर्म है। हिंदू वोट को साधने की होड़ में तृणमूल और बीजेपी दोनों ही धर्म की राजनीति को खुलकर खेल रही हैं। मंदिरों की यात्रा हो या त्योहारों की भव्यता—हर मंच पर अब राजनीति है।
इसी बीच वक्फ संशोधन अधिनियम ने बंगाल की ज़मीन को और ज्यादा गरमा दिया है। मुर्शिदाबाद, मालदा और भांगड़ में जो विरोध शुरू हुआ था, वो देखते ही देखते हिंसा में बदल गया। तीन मौतें, 200+ गिरफ्तारियां और पैरा मिलिट्री की तैनाती—ये सब संकेत हैं कि बंगाल की ज़मीन अब पूरी तरह चुनावी रणक्षेत्र बन चुकी है।
🔥 “हिंदू वोट” का नया टारगेट!
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो BJP जहां राम मंदिर और हिंदू पहचान की राजनीति कर रही है, वहीं TMC अब देवी पूजाओं और धार्मिक आयोजनों से अपने पुराने मुस्लिम वोट बैंक के साथ हिंदू वर्ग को भी जोड़ने की रणनीति में है।
😠 मुस्लिम समाज में नाराज़गी?
वहीं मुस्लिम समाज के कई वर्गों में इस नई राजनीतिक होड़ को लेकर गहरा असंतोष देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसका असर साफ दिख रहा है—जहां एक तरफ मुस्लिम युवाओं का TMC से मोहभंग हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ BJP को लेकर भय और अविश्वास बना हुआ है।
क्या ये नाराज़गी 2026 में वोटों का गणित बदल सकती है? यह देखने वाली बात होगी।










