जय नगर गांव में उबाल: तारा माइंस के खिलाफ सड़कों पर उतरे ग्रामीण, बोले- अब नहीं सहेंगे अन्याय!

single balaji

चिरुलिया (जामुड़िया): चिरुलिया क्षेत्र में स्थित तारा ओपन कास्ट माइंस के खिलाफ जय नगर गांव के ग्रामीणों का गुस्सा बुधवार को उफान पर पहुंच गया। खदान विस्तार, बेरोजगारी, जल-संकट और ब्लास्टिंग से हो रहे नुकसान को लेकर ग्रामीणों ने खनन कार्य को पूरी तरह ठप कर दिया

🔥 “सड़क काट दी, अब रास्ता कहां से जाएं?” — गांववालों का सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि माइंस विस्तार के नाम पर गांव की मुख्य सड़क को काट दिया गया, जिससे बच्चों के स्कूल जाने, मरीजों के इलाज और रोज़मर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कत हो रही है। यह उनके जीवन के साथ खिलवाड़ है।

💣 “हर दिन ब्लास्टिंग, घरों में दरारें!” — डर में जी रहे हैं लोग

प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने बताया कि माइंस में रोजाना हो रही ब्लास्टिंग से उनके कच्चे और पक्के घरों की दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। कई घर कभी भी गिर सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि “ब्लास्टिंग बंद हो या फिर कंपनी मुआवज़ा दे”

🚱⚡ “ना पानी, ना बिजली — माइंस से मुनाफा, हमें नुकसान”

जय नगर गांव में पीने के पानी का भारी संकट बना हुआ है और बिजली भी अनियमित है। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस इलाके का फायदा तो ले रही है लेकिन गांव की बुनियादी जरूरतों पर कोई ध्यान नहीं दे रही

👷‍♂️ “बेरोजगारों को नौकरी मिले, तभी चलेगा काम” — युवाओं की हुंकार

गांव के बेरोजगार युवाओं को प्राथमिकता पर रोजगार देने की मांग भी प्रमुख है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर हमारे ही घर के पास खदान है तो काम भी हमें मिलना चाहिए, बाहर से लोगों को लाकर नौकरी देना अन्याय है

👮 थाना प्रभारी के आश्वासन पर हटा अवरोध

लगातार प्रदर्शन के बीच चिरुलिया फाड़ी प्रभारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर बेरोजगार युवाओं की सूची बनाकर उन्हें रोजगार दिया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने अस्थायी रूप से अवरोध हटा लिया, लेकिन चेतावनी दी कि यदि वादे पूरे नहीं हुए, तो आंदोलन और तेज होगा

📢 प्रमुख मांगें:

  • ✔️ गांव की कटी हुई सड़क की मरम्मत
  • ✔️ स्थानीय युवाओं को नौकरी
  • ✔️ ब्लास्टिंग पर रोक या मुआवजा
  • ✔️ जल और बिजली संकट का स्थायी समाधान
  • ✔️ माइंस प्रबंधन की सीधी जवाबदेही

🗣️ निष्कर्ष:
जय नगर गांव का यह आंदोलन केवल सड़क या नौकरी की लड़ाई नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई है। अब देखना यह है कि सरकार और माइंस प्रबंधन इस जनआक्रोश के आगे क्या रुख अपनाते हैं।

ghanty

Leave a comment