हरगोबिंद-चंदन की हत्या से उबाल पर बंगाल, सड़क पर उतरी बीजेपी – टीएमसी ने दिया तीखा जवाब

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कोलकाता/मुर्शिदाबाद: पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा के हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर राज्य की सियासत में ज़हर घोल दिया है। मुर्शिदाबाद ज़िले के बहरामपुर में एक प्रतिष्ठित मूर्तिकार हरगोबिंद दास (74) और उनके बेटे चंदन दास (40) की निर्मम हत्या ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्यव्यापी प्रदर्शन किया और ममता सरकार पर सीधा हमला बोला।

बुधवार को आसनसोल दक्षिण की भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल के नेतृत्व में बर्नपुर के त्रिवेणी मोड़ पर ‘हिंदू शहीद दिवस’ मनाया गया। कार्यकर्ताओं ने सड़क पर शहीद वेदी बनाकर मृत पिता-पुत्र को श्रद्धांजलि दी। मौके पर ‘जय श्री राम’ और ‘ममता हटाओ – बंगाल बचाओ’ जैसे नारे गूंजते रहे।

🔥 अग्निमित्रा पॉल का सीधा हमला:

विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा,

“यह हत्याएं सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति पर हमला हैं। एक खास समुदाय के उपद्रवियों ने इसे अंजाम दिया, और ममता बनर्जी की सरकार मूकदर्शक बनी रही।”

उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार और स्थानीय हिंदुओं को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया गया, और पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत से यह सब संभव हुआ। पॉल ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट के दखल के बाद ही केंद्रीय बलों की तैनाती हुई, वरना हालात और बिगड़ सकते थे।

🧨 तनाव और सियासी घमासान:

करीब आधे घंटे तक चला यह प्रदर्शन पूरे क्षेत्र को तनावग्रस्त बना गया। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। दुकानों के शटर गिरा दिए गए, और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

🌀 टीएमसी का पलटवार:

टीएमसी के पश्चिम बर्दवान जिलाध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती ने पलटवार करते हुए कहा,

“बीजेपी हमेशा दंगा राजनीति करती है। यह वही पार्टी है जो आग लगाती है, फिर रक्षक बनने का नाटक करती है।”

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं कि यह घटना “पूर्वनियोजित और प्रायोजित साजिश” है, जिसे कुछ बाहरी ताकतों ने अंजाम दिया।

🔍 जनता में बेचैनी – सवालों के घेरे में कानून व्यवस्था:

हरगोबिंद दास एक सम्मानित मूर्तिकार थे, जो दशकों से दुर्गा प्रतिमाएं बना रहे थे। उनकी हत्या ने बंगाल के गांव-गांव में आक्रोश की लहर फैला दी है। लोग पूछ रहे हैं –

“क्या अब मूर्तिकार भी सुरक्षित नहीं रहे?”

बीजेपी इस मुद्दे को विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बना सकती है। वहीं टीएमसी इसे “राजनीतिक नौटंकी” बता रही है।

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