कोलकाता, 9 अप्रैल — सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद नौकरी से निकाले गए योग्य शिक्षकों में उबाल देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से ही राज्यभर के जिलों में डिस्टिक्ट इंस्पेक्टर (डिआई) ऑफिसों के सामने जोरदार प्रदर्शन, तालेबंदी, सड़कों पर धरना, पुलिस से झड़प, और कहीं-कहीं लाठीचार्ज में घायल शिक्षक — बंगाल का हर कोना आंदोलन की चपेट में है।
🔥 कसबा में तालाबंदी तोड़कर घुसे शिक्षक, पुलिस की लाठी से कई घायल
कोलकाता के कसबा इलाके में आंदोलनकारी शिक्षकों ने डिआई ऑफिस का ताला तोड़ा, सुरक्षाकर्मियों को हटाकर अंदर घुस गए। स्कूल इंस्पेक्टर की गैरमौजूदगी से नाराज होकर प्रदर्शन और तेज हो गया। पुलिस की लाठीचार्ज में कई शिक्षक घायल हुए।
प्रदर्शनकारी प्रताप रायचौधुरी ने कहा, “हम योग्य हैं, फिर भी नौकरी गई। अब हमें सड़कों पर बैठना पड़ रहा है, और पुलिस ने बर्बरता दिखाई।”

लालबाजार पुलिस का बयान है — “बिना उकसावे के पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया, जिससे हमें हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।” 4 पुरुष और 2 महिला पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
📍 हुगली, मेदिनीपुर, मालदा, बालुरघाट, सिलीगुड़ी — हर जगह तनाव और उबाल

- हुगली: जीटी रोड जाम, डिआई ऑफिस में ताला
- मालदा: डिआई ऑफिस के सामने घेराव, पुलिस से धक्का-मुक्की
- बालुरघाट: बैरिकेड तोड़कर ऑफिस में प्रवेश, घंटों धरना
- तमलुक: ऑफिस के मुख्य द्वार पर ताला, कर्मचारियों को प्रवेश नहीं
- मेदिनीपुर, कृष्णनगर, मुर्शिदाबाद: टायर जलाकर रास्ता जाम, “इंसाफ चाहिए” के नारे
📌 आंदोलनकारियों की मुख्य माँगें क्या हैं?
- योग्य उम्मीदवारों को फिर से बहाल किया जाए।
- अयोग्य लोगों की पहचान कर उन्हें अलग किया जाए।
- नई भर्ती हो तो पहले योग्य लोगों की सूची जारी की जाए और उन्हें नियुक्त किया जाए।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है, “मैं योग्य लोगों के साथ हूं,” लेकिन जिलों में चल रहे आंदोलन दिखाते हैं कि शिक्षक अभी भी सरकार पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
🚨 संभावित अगला कदम क्या?
सूत्रों की मानें तो शिक्षक संघ जल्द ही राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ की ओर मार्च की योजना बना रहा है। अगर मांगे नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन सड़कों से विधानसभा तक पहुंच सकता है।










