वक्फ संशोधन कानून पर बवाल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ अब कानूनी जंग छिड़ चुकी है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए 6 अप्रैल की देर रात सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है।

🧑‍⚖️ सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की तैयारी:

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।

याचिकाकर्ताओं में AIMPLB के अलावा, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, और आप विधायक अमानतुल्लाह खान भी शामिल हैं।

📜 राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बढ़ा विवाद:

5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ संशोधन विधेयक को मंजूरी दी थी, जिसे संसद में तीखी बहस के बाद पारित किया गया था।

📢 AIMPLB का विरोध: “मौलिक अधिकारों का हनन”

AIMPLB के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि—

“वक्फ संशोधन कानून मनमाना, भेदभावपूर्ण और मुस्लिम समुदाय को दरकिनार करने वाला है। यह न सिर्फ संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन करता है, बल्कि सरकार की मंशा भी साफ झलकती है— वक्फ प्रशासन पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना।”

⚖️ संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 पर सवाल:

AIMPLB ने कहा कि इस कानून से मुस्लिम समुदाय को उनके धार्मिक और धर्मार्थ संस्थाओं के प्रबंधन का अधिकार छीन लिया गया है। अन्य धर्मों— हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध—के धार्मिक न्यासों को जिस सुरक्षा और अधिकार प्राप्त है, उसे मुस्लिम वक्फ से क्यों वंचित किया गया?

❗ कानून के विवादित बिंदु:

  • वक्फ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल के सदस्यों की नियुक्ति में सरकार का पूर्ण हस्तक्षेप
  • वक्फ दाता (waqif) के लिए 5 वर्षों से “प्रैक्टिसिंग मुस्लिम” होने की अनिवार्यता, जो न सिर्फ संविधान बल्कि शरीयत के भी खिलाफ है
  • वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर समुदाय का नियंत्रण कम करना

📣 मुस्लिम लॉ बोर्ड का आह्वान:

AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वो संविधान की संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करे और इन विवादास्पद संशोधनों को निरस्त करे।

यह याचिका वरिष्ठ वकील एम आर शमशाद के माध्यम से दाखिल की गई है, जबकि एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड तल्हा अब्दुल रहमान और AIMPLB के महासचिव मौलाना फजलुर रहीम मुझद्ददी इसमें प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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