नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) बिल 2024 को लोकसभा में फिर से पेश किया, जिससे संसद में भारी हंगामा देखने को मिला। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इस बिल को बुधवार को लोकसभा में विचार और पारित करने के लिए पेश किया। उन्होंने कहा, “कुछ धार्मिक नेता मासूम मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहे हैं। इन्हीं लोगों ने CAA को लेकर भी झूठ फैलाया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।”
लोकसभा के बिजनेस एडवायजरी कमेटी (BAC) ने इस बिल पर 8 घंटे की बहस तय की है, जिसे जरूरत पड़ने पर बढ़ाया जा सकता है।
🔥 वक्फ संशोधन बिल: क्या है विवाद?
✅ वक्फ बोर्ड का CEO गैर-मुस्लिम भी हो सकता है!
✅ राज्य सरकार को वक्फ बोर्ड में 2 गैर-मुस्लिम सदस्यों को नियुक्त करने की अनुमति!
✅ किसी भी विवादित संपत्ति का वक्फ स्टेटस तय करेगा ज़िला कलेक्टर!
✅ “वक्फ बाय यूज़र” की धारणा को खत्म कर दिया गया है!
✅ 6 महीने के भीतर सभी वक्फ संपत्तियों का केंद्रीय डेटाबेस में पंजीकरण अनिवार्य!
✅ वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले की अंतिमता समाप्त!
ये प्रावधान देशभर में विवाद का कारण बने हुए हैं। विपक्षी दल और मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों पर सरकार का सीधा नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश है।
⚡ विपक्ष का आरोप: “मुस्लिम संपत्तियों पर कब्ज़े की साजिश!”
🔹 कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल को मुस्लिम अधिकारों पर हमला बताया।
🔹 विपक्ष का आरोप है कि “हमारे द्वारा सुझाए गए 44 संशोधन खारिज कर दिए गए, जबकि NDA के 14 संशोधन स्वीकार किए गए!”
🔹 विपक्षी नेताओं ने कहा कि “CAA की तरह यह बिल भी मुस्लिम समुदाय को डराने की एक और साजिश है!”
हालांकि, किरण रिजिजू ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा, “इस बिल को लेकर विपक्षी पार्टियां राजनीतिक खेल खेल रही हैं।”
🔴 बिल का इतिहास: पहले भी विवाद, अब और बवाल!
✅ 2023 में पेश हुआ यह बिल भारी हंगामे के बाद संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया।
✅ 13 फरवरी को समिति ने रिपोर्ट सौंप दी, जिसे 19 फरवरी को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी।
✅ विपक्ष ने आरोप लगाया कि उनकी असहमति वाली टिप्पणियों को रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया!
⚠️ वक्फ बिल के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी!
सूत्रों के मुताबिक, देशभर के मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के खिलाफ बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। कई मस्जिदों और धार्मिक केंद्रों में इस बिल के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
ऐसे में यह साफ हो गया है कि वक्फ संशोधन बिल का विवाद केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़कों तक पहुंचेगा!













