आसनसोल: आसनसोल के सांसद और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर करारा हमला बोलते हुए महाकुंभ के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़े “हकीकत से परे” हैं और प्रयागराज में गंगा का प्रदूषण कई गुना बढ़ गया है, जबकि सरकार केवल “बाहरी दिखावा” कर रही है।

🗞️ “अखबार भी तुम्हारा, कानून भी तुम्हारा, दरबार भी तुम्हारा!”
➡️ सिन्हा ने मीडिया, प्रशासन और कानून पर सरकार के प्रभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि “जो सरकार चाहती है, वही सुर्खियों में आता है!”
➡️ उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सरकार को गंगासागर मेले की व्यवस्था “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से सीखनी चाहिए”, जहां “आम जनता के लिए सर्वोत्तम सुविधाएं प्रदान की गईं।”

💥 महाकुंभ पर सरकार के दावों पर सवाल!
📌 सिन्हा ने कहा कि सरकार 144 साल बाद के महाकुंभ का दावा कर रही है, जबकि धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह आयोजन नियमित अंतराल पर होता है।
📌 उन्होंने कहा कि यूपी सरकार वास्तविक आंकड़ों को छिपा रही है और कुंभ में बढ़ते प्रदूषण को नजरअंदाज कर रही है।

⚠️ टीएमसी में बढ़ा विवाद! रचना बनर्जी की तारीफ बनी मुद्दा
📌 टीएमसी सांसद रचना बनर्जी द्वारा महाकुंभ की व्यवस्था की प्रशंसा किए जाने से पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ गया है।
📌 पार्टी के शीर्ष नेताओं का मानना है कि सिन्हा और रचना बनर्जी की टिप्पणियां पार्टी की आधिकारिक नीति के खिलाफ जा सकती हैं।
📌 टीएमसी नेतृत्व जल्द ही दोनों सांसदों को चेतावनी जारी कर सकता है!

🙏 महाकुंभ का धार्मिक महत्व
📌 कुंभ में स्नान को मोक्ष प्राप्ति से जोड़ा जाता है, लेकिन आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु का मानना है कि “सिर्फ एक दिन डुबकी लगाने से पाप नहीं धुलते, बल्कि इसे आध्यात्मिक साधना के रूप में देखना चाहिए!”
🔥 क्या यूपी सरकार की व्यवस्था में सच में खामियां हैं, या यह सिर्फ सियासी हमला?
📌 महाकुंभ 2025 का आयोजन प्रयागराज में हो रहा है, जहां लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा रहे हैं।
📌 लेकिन क्या सरकार आलोचना से बचने के लिए मीडिया और आंकड़ों में खेल कर रही है?
📢 क्या यूपी सरकार ममता बनर्जी से सीख लेगी? या ये केवल चुनावी बयानबाजी है?













