रानीगंज।
आदिवासी गौरव, उलगुलान आंदोलन के नायक और ‘धरती आब्बा’ के नाम से विख्यात स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर रविवार को रानीगंज के रानीसायर मोड़ पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पश्चिम बर्दवान जिले भर में आदिवासी समुदाय के लोगों ने उत्साह और सम्मान के साथ इस ऐतिहासिक दिन को मनाया।
सुबह से ही राष्ट्रीय राजमार्ग 19 के किनारे स्थित रानीसायर मोड़ पर आदिवासी संगठनों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या उमड़ पड़ी। बाबा बिरसा जन्मजयंती पालन समिति द्वारा बिरसा मुंडा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर समारोह की शुरुआत की गई। इसके बाद मंच पर पारंपरिक तरीके से ढोल, मांदर और तीर-धनुष के साथ आदिवासी नृत्य के शानदार प्रदर्शन ने पूरे इलाके का माहौल उत्सवमय बना दिया।
⭐ उलगुलान के नायक की गाथा गूंज उठी रानीगंज में
कार्यक्रम के दौरान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और 1899–1900 के ‘उलगुलान’ विद्रोह का विस्तृत वर्णन किया गया। वक्ताओं ने उनके द्वारा आदिवासी समाज के अधिकार, संस्कृति और स्वाभिमान के लिए किए गए संघर्ष को याद करते हुए कहा—
“धरणी आब्बा आज भी आदिवासी समाज की प्रेरणा और साहस के प्रतीक हैं।”
⭐ विधायक तापस बनर्जी ने किया माल्यार्पण
रानीगंज विधानसभा के विधायक तापस बनर्जी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सिदो–कान्हू की प्रतिमा और बिरसा मुंडा की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा—
“आदिवासी समाज हमारी संस्कृति की रीढ़ है। उनकी परंपरा, इतिहास और अधिकारों की रक्षा हमारी जिम्मेदारी है।”
उन्होंने आदिवासी समुदाय के साथ सदैव खड़े रहने का भरोसा भी दिलाया।
⭐ कई आदिवासी नेता रहे मौजूद
कार्यक्रम में आदिवासी संगठनों की ओर से
कंदन हांसदा, मोतीलाल सोरेन, हीरालाल सोरेन, रामलाल टुडू, सोनाराम हांसदा, जनार्दन कारा,
डॉ. नागेंद्रनाथ सोरेन सहित कई प्रमुख सदस्य उपस्थित थे।
🎉 जयंती से बना सांस्कृतिक उत्सव
नृत्य, गीत और जनसभा के माध्यम से ‘धरती आब्बा’ के जीवन का चित्रण करते हुए कार्यक्रम किसी सांस्कृतिक महोत्सव से कम नहीं था। महिलाओं, युवाओं और बच्चों की भारी भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि बिरसा मुंडा आज भी आदिवासी समाज की आस्था और आत्मबल का प्रतीक हैं।











